सूरज बोला मां से।
जा रहा हूं दूर सफर पर,
दे दो मां कुछ पैसे।
मां पकड़ाई पैसों की थैली,
बतलाई कुछ नीति का मंत्र।
बुरे लोगों से बचकर रहना,
मत करना तुम कभी कुसंग।
राहु–केतु दो शैतान बड़े हैं,
लाख बुलाए पर मत जाना।
ध्यान सदा तुम लक्ष्य पर रखकर,
आगे कदम बढ़ाते रहना।
काले घने बादल की टोली,
ये भी करते बुरा बर्ताव।
चमक देख जलते हैं तुमसे,
ललकारे लाख मत देना जवाब।
कभी फेंककर पानी के छींटे,
कभी बिजली से तुम्हे डराएगा।
सहज भाव से बढ़ते रहना,
खुद ही निर्लज्य शर्माएगा।
होगा पूरा सफर तुम्हारा,
लक्ष्य पाने को जिद्द रखना।
लाख मुसीबत आए आगे,
हमेशा कदम बढ़ाते रहना।
....जितेंद्र कुमार

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